हमारी जीवनयात्रा कई जन्मो से चली आ रही होती है, जब से हम माँ के गर्भ में होते है तब से लेकर मृत्यु तक हम कई लोगो से मिलते है, कई लोगो से बिछड़ते है, किसीसे लम्बे समय तक हमारा रिश्ता होता है तो कोई पल भर के लिए मिलके विदा हो जाता है...जेसे की हम छोटे होते है तब से कई रिश्ते हमे जनम के साथ ही मिलते है जेसे की माता-पिता, दादी- दादा ,भाई-बेहन,मामा-मामी,चाचा-चाची, मासा- मासी, नाना- नानी,....पर कुछ रिश्ते हम बनाते है जेसे मित्र, पत्नी, पति,...यह सब रिश्ते कई जन्मो से हमारे साथ जुड़े हुए होते है किसी न कसी रूप में जो हमारी आशक्ति के कारन फिर फिरसे हमे इस जनम में मिलते है...
दुनिया के हर लोग जिससे हम कुछ समय के लिए मिले हो या फिर लम्बे समय से साथ हो, सब कुछ न कुछ सिखाके जाते है तो कुछ हमसे सीखके जाते है, कुछ सुख देनेवाले होते है ,तो कुछ बुरी याद बनके दर्द बन जाते है, पर एक ऐसा रिश्ता जो हर जनम मे बचपन से लेकर मृत्यु तक साथ रहता है, बचपन आता है और चला जाता है , पर बचपन में कि हुइ मस्ती, शरारते , रोना , हँसना , वो सारी यादे जिसे याद रहती है , जवानी आती है और चली जाती है देखते ही देखते बुढ़ापा आता है और ना जाने कब मौत गला दबोच लेती है पर इन सब में जो कभी साथ नहीं छोड़ता और सब बीत जाने पर भी जो नहीं बितता ऐसा एक अनोखा रिश्ता हर समय , हर जनम में साथ रहता है...वो है हमारा आत्मदेव से रिश्ता.!
हम कभी क्यों अपना कीमती समय ऐसे अनमोल रिश्ते को नहीं देते ?? दुनिया के सारे रिश्तो पे हम हमारा कीमती समय देते है, उन रिश्तो को खुश करने में उन्हें मनाने में हमारी पूरी जिंदगी बीत जाती है पर जो सच में अपना है और कभी नहीं बीतता हमेशा वेसे का वेसे ही साथ रहता है ऐसे अनमोल आत्मदेव के साथ रिश्ते को क्यों भूल जाते है जो हमारी हर पल को याद रखता है उसे पहचानने के लिए क्या हमे समय नहीं देना चाहिए... जिस दिन हम अपने आत्मदेव को जान लेते है उस दिन तू और मैं का भेद मिट जाता है और हम जनम मरण के चक्कर से हमेशा के लिए मुक्त हो जाते है..
तो देर ना करे रोज अपना कुछ समय अपने आपको दे मतलब पूछे अपने आप से "मैं कौन हूँ???" एक दिन जरुर जवाब मिलेगा की "मैं कौन हूँ????"Coming Soon
हम कभी क्यों अपना कीमती समय ऐसे अनमोल रिश्ते को नहीं देते ?? दुनिया के सारे रिश्तो पे हम हमारा कीमती समय देते है, उन रिश्तो को खुश करने में उन्हें मनाने में हमारी पूरी जिंदगी बीत जाती है पर जो सच में अपना है और कभी नहीं बीतता हमेशा वेसे का वेसे ही साथ रहता है ऐसे अनमोल आत्मदेव के साथ रिश्ते को क्यों भूल जाते है जो हमारी हर पल को याद रखता है उसे पहचानने के लिए क्या हमे समय नहीं देना चाहिए... जिस दिन हम अपने आत्मदेव को जान लेते है उस दिन तू और मैं का भेद मिट जाता है और हम जनम मरण के चक्कर से हमेशा के लिए मुक्त हो जाते है..
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