RakshaBandhan
पौराणिक प्रसंग:-
स्कन्ध पुराण, पद्मपुराण और श्रीमद्भागवत में वामनावतार नामक कथा में रक्षाबन्धन का प्रसंग मिलता है। कथा कुछ इस प्रकार है-दानवो के राजा बलि ने जब १०० यज्ञ पूर्ण करके स्वर्ग का राज्य छिनने का प्रयत्न किया तब देवो के राजा इन्द्र और बाकी सारे देवता भगवान विष्णु के पास गए और मदद की प्रार्थना की, भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर ब्रामण वेष में राजा बलि के पास भिक्षा मांगने पहुंचे और राजा बलि ने गुरु के मना करने के बावजूद वामन अवतार में आये हुए भगवान विष्णु को तीन पग भूमि दान में दी और भगवान ने तीन पग में सारा आकाश, पाताल और धरती नापकर राजा बलि को रसातल में भेज दिया, इस प्रकार भगवान विष्णु द्वारा बलि राजा के अभिमान को चकनाचूर कर देने के कारण यह त्योहार बलेव नाम से भी प्रसिद्ध है, उसके बाद राजा बलि ने भगवान की भक्ति से उन्हें प्रसन्न करके उनको दिन रात अपने साथ रहेने का वरदान माँगा, भगवान का बहोत समय तक ना लौटना देखकर माता लक्ष्मी चिंतित हुई और नारदजी के सुजाये उपाय से माता लक्ष्मी ने रसातल में जाकर राजा बलि को राखी बाँधी और अपने पति भगवान विष्णु को राजा बलि के वचन से मुक्त कराके वहाँ से अपने साथ ले आई तब से इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है राखी बाँधते समय,
येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥
इस श्लोक का हिन्दी भावार्थ है- "जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधता हूँ। हे रक्षे (राखी)! तुम अडिग रहना (तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।)"
एतहासिक प्रसंग :-
महाभारत में जब ज्येष्ठ पांडव युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा की मै सब संकटो से कैसे पार कर सकता हूँ तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी तथा उनके सेना की रक्षा करने के लिए रक्षबंधन त्यौहार मनाने की सलाह दी थी उनका कहना था की राखी के इस रेशमी धागे में वह शक्ति है जिससे आप हर आपत्ति से पार हो सकते हो, एक बार जब श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी पर चोंट आ गयी तब द्रोपदी ने अपनी साडी फाड़कर उनकी उंगली पर पट्टी बांध दी उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था उसका बदला श्रीकृष्ण ने चीरहरण के समय द्रोपदी के साडी को बढ़ाकर चुकाया..
एक दूसरे की रक्षा और सहयोग की भावना रक्षाबन्धन के पर्व से ही प्रारम्भ हुई.
धार्मिक प्रसंग:-
राजस्थान में रामराखी और चूड़ाराखी बाँधने का रिवाज़ है। रामराखी सामान्य राखी से अलग होती है, उसमें लाल डोरे पर एक पीले छींटों वाला फुँदना लगा होता हैऔर यह सिर्फ भगवान को ही बाँधी जाती है। चूड़ा राखी भाभियों की चूड़ियों में बाँधी जाती है। जोधपुर में राखी के दिन केवल राखी ही नहीं बाँधी जाती, बल्कि दोपहर में पद्मसर और मिनकानाडी पर गोबर, मिट्टी से स्नान कर शरीर को शुद्ध किया जाता है। इसके बाद धर्म तथा वेदों के अनुसार अरुंधती ,गणपति ,दुर्गा,तथा सप्तर्षियो के दर्भ के पूजास्थल बनाकर उनकी मन्त्रोच्चारण के साथ पूजा की जाती हैं। उनका तर्पण कर पितृऋण चुकाया जाता है। धार्मिक अनुष्ठान करने के बाद घर आकर हवन किया जाता है, वहीं रेशमी डोरे से राखी बनायी जाती है। राखी को कच्चे दूध से अभिमन्त्रित करते हैं और इसके बाद ही भोजन करने की मान्यता है.
तमिलनाडु ,महाराष्ट्र,केरल और उड़ीसा के दक्षिण भारतीय ब्राह्मण इसे अवनि अवित्तम कहते हैं। जब की उत्तरांचल में इसे श्रावणी कहा जाता है और गुजरात तथा उत्तरप्रदेश श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है। रक्षा बंधन के अवसर पर बहिन अपना सम्पूर्ण प्यार रक्षा (राखी ) के रूप में अपने भाई की कलाई पर बांध कर उड़ेल देती है। भाई इस अवसर पर कुछ उपहार देकर भविष्य में संकट के समय सहायता देने का बचन देता है।
आधुनिक रक्षाबंधन:-
कुछ समय पहले बहन अपने भाई को राखी डाक-तार द्वारा भेजती थी पर आज के आधुनिक तकनिकी युग में जहाँ बहुत सारे भारतीय आजकल विदेश में रहते हैं एवं उनके परिवार वाले (भाई एवं बहन) अभी भी भारत या अन्य देशों में हैं। इण्टरनेट के आने के बाद कई सारी ई-कॉमर्स साइट खुल गयी हैं जो ऑनलाइन आर्डर लेकर राखी दिये गये पते पर पहुँचाती है तथा डिजिटल राखी से भी काम चलाया जाता है, और भाई भी अपनी बहनों को ऑनलाइन ही गिफ्ट्स खरीदके दिए गए पते पर भेज देते है पर इन सब में उनका प्यार और भाव तो वही रहता है...
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रक्षाबंधन का महत्व और सारांश :-
रक्षाबंधन सिर्फ और सिर्फ भाई -बेहन का ही त्यौहार नहीं होता बल्कि सही मान्यो में तो जीव और शिव का, मतलब की भक्त और भगवान या गुरु का त्यौहार भी होता है क्योंकि सही मान्यो में तो रक्षा गुरु और भगवान ही करते है हर उस मुशीबत से , विकारों से ,गलत संग से , हर उस परिस्थिति से जहाँ हमारा हित ना हो, इसीलिए ऐसा पवित्र रक्षासूत्ररूपी धागा अपने गुरु या भगवान को जरुर बांधना चाहिए जो हमारी इस लोक और उस लोक दोनों में रक्षा करे...
HAPPY RAKSHABANDHAN 

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